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कविताएं लोगों को स्वतंत्र रुप से सोचने और बोलने के लिए प्रेरित करती हैः संकेत म्हात्रे | Indie Music Artist Interviews

कविताएं लोगों को स्वतंत्र रुप से सोचने और बोलने के लिए प्रेरित करती हैः संकेत म्हात्रे

By - टीम रेडियो सिटी

JUNE 25,2018

संकेत म्हात्रे
एक पूर्व विज्ञापन व्यवसायी संकेत म्हात्रे ने सचमुच जिंदगी के दोनों किनारों को देखा है। भले वे किसी एजंसी के प्रतिनिधि हो या खुद एक क्लाइंट हो, लेकिन कलम हमेशा उनका सबसे प्यारा मित्र रहा है। 30 जून, 2018 को फन रिपब्लिक सोशल, अंधेरी में आयोजित होने वाले फ्री वर्स सेशंस से पहले रेडियो सिटी फ्रीडम ने इस युवा कवि को खास मुलाकात के लिए बुलाया था।

सवालः आपने पहली बार शब्दों तथा काव्य रचना की कला को खुद में कब महसूस किया?
संकेत: पाब्लो नेरुदा द्वारा लिखी एक शानदार कविता है जो केवल यह बताती है। और उस उम्र में कविता मेरी तलाश में आईं, पता नहीं कहाँ से। किंतु जो कविता वहाँ थी वो मेरे दिल को छू गई। जब आप कविता के बारे में सोचते हैं तो सही पल का पता लगाना बहुत मुश्किल है। और जब यह पहली बार है तो और भी ज्यादा मुश्किल होता है। मैं एक बच्चा था तब से कविताएं, कविता या काव्य मेरे हृदय में हमेशा से जगह बना रही थी। मुझे केवल इसका एहसास बहुत देर समय बाद हुआ। मुझे लगता है कि यह कविता थी जिसने मुझे चुना है, मैंने कविताओं को नहीं। मैं 13 वर्ष का था जब मैंने अपनी पहली मराठी कविता लिखी थी, जो अंधेरे पर आधारित थी। तब कई कवियों ने काफी सराहना की और मैं तब से लिखता आ रहा हूं। हालांकि, पिछले 4-5 सालों से कविता प्रदर्शित होती रही है। 

सवालः आज आपका वाक्-स्वातंत्र की तरफ क्या दृष्टिकोण है?
संकेत: हर युग में, जब भी कोई आंदोलन होता है तो एक काउंटर आंदोलन अवश्य होता है। इस युग में हमारा सिस्टम और बड़ी शक्तियाँ जो हमारे अधिकारों और हमारी स्वतंत्रता पर नज़र रखने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। लेकिन अच्छी बात यह है की कविताएँ भी वाक्-स्वातंत्र के लिए एक काउंटर आंदोलन की तरह विकसित हो रही है। यह लोगों को खुल के सोचने और बोलने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी तरह से हम आगे बढ़ते हैं। आज की पीढ़ी ने अपनी आवाज़ खोज ली है। मुझे खुशी इस बात की है कि यह सब जितना संगीत तथा फिल्मों के माध्यम से हो रहा है, उतना ही अधिक शब्दों तथा काव्यों के माध्यम से भी हो रहा है। 

सवालः साहित्य में आपके प्रेरणास्थान कौन हैं? (पसंदीदा लेखक तथा कवि)
संकेत: अरे वाह! इस बारे में तो मैं पूरी रात बात कर सकता हूँ। आपको एक नहीं बल्कि कई गुरु मिलेंगे। जी.ए. कुलकर्णी, कमल देसाई, कवि ग्रेस, विंदा करंदीकर, इन्दिरा संत, मंगेश पाडगांवकर, सुरेश भट। आज के जमाने मे मुझे अशोक नायगावकर और नीलेश पाटील सबसे पसंद हैं। उर्दू कविता में बशीर बद्र, फैज अहमद फैज, राहत इंदोरी। अंग्रेजी में स्टीफन किंग, डब्लू सौमर्सट मौघहम और पाब्लो नेरुड़ा, औक्टवियो पाझ और अर्नेस्टो कार्डेनल की सारी कविताएं। विज्ञापन में डेविड औग्लिवी और नील फ्रेंच – वह मेरे सबसे प्रिय है। वैसे भी जितना आंखो को भाता है, उससे तो कई ज्यादा होते हैं।

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