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मनुष्यता और कला को हमारे सिस्टम में कोई जगह नहीं है: रम्या पंडयन | Indie Music Artist Interviews

मनुष्यता और कला को हमारे सिस्टम में कोई जगह नहीं है: रम्या पंडयन

By - टीम रेडियो सिटी

JULY 23,2018

रम्या पंडयन
लेखिका रम्या पंडयन जिनका बचपन से ही कलम सच्चा दोस्त रहा है और २००४ में उन्होंने सूडनीम आइडियास्मिथ के तहत अपने विचार वेब पर डालना शुरू किया। तब से वह शब्दों में लिप्त होती आ रही है, जो मंच पर अपनी कविताओं को प्रस्तुत करने से भी पीछे नहीं हटती और पिछले 3 सालों से करती आ रही है। उनका ज्यादातर कार्य एक क्षमाशील सामाजिक और कॉर्पोरेट वातावरण में होने वाले औरत के संघर्षों को दर्शाता है। उन्हें मुंबई शहर से काफी प्यार है और वह चाहती है की इस शहर के प्रति अपने प्यार को 28 जुलाई, 2018 को आयोजित होने वाले फ्रीवर्स सेशंज में अपने काव्यों द्वारा प्रस्तुत कर पाएं, तो रेडियो सिटी फ्रीडम ने उन्हें खास बातचीत के लिए बुलाया था।

सवाल: क्या कविता आपके लिए सहज है या वह पढ़ने लिखने की आदत थी जिस वजह से आप प्रोत्साहित हुई?

रम्या: मैंने लिखना बहुत छोटी उम्र से शुरू किया था, तब से जबसे मैंने वास्तविक रुप में पढ़ना सीखा था। इसलिए मैं उन दोनों के बीच अंतर नहीं कर सकती। मैंने हर तरह के लेखन का परिक्षण किया है और आज भी मैं अपने रचनात्मक गुणों को बढ़ाने की कोशिश करती रहती हूँ। संगीत में भी मेरा एक अनुभव है। मेरी आज-कल की प्रस्तुत कविताएं/उच्चरित शब्दों में बढ़ती रुचि ने मुझे मेरे दोनों अनुभवों को एक-साथ लाने की अनुमति दी और वो हैं स्टेज और शब्दों के प्रति मेरा प्यार। मैं रोज पढ़ती हूँ, लगातार परिक्षण करती हूं कि कैसे लोग शब्दों तथा भाषाओं का उपयोग करते हैं। मैं रोज बहुत कुछ लिखती भी हूँ, कभी-कभी सार्वजनिक तौर से किन्तु हमेशा सम्पादन, पुनरलेख्न और आलेख के तौर से। कविता भी किसी और कला की तरह है - उसे रियाज और लालन-पालन की आवश्यकता होती है जो मैं जितना ज्यादा हो सकता है करती हूँ। मैं भी लगभग हर दिन बहुत कुछ लिखती हूं  कभी-कभी सार्वजनिक रूप से लेकिन अक्सर संपादन, पुनर्लेखन और प्रारूपण। कविता किसी भी अन्य कला की तरह है - इसे रियाज और अच्छे पोषण की ज़रूरत है और यह मैं जितना हो सकता है उतना करती हूं।

सवालः आप व्यक्तिगत रूप से कैसी कविताएं पसंद करती है? अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में या विषयों पर दबाव डालने के लिए एक संवाद शुरू करने के प्रयास के रूप में?

रम्या: मेरे लिए यह दोनों है, भले मेरे काम का विषय जो भी हो - मुंबई, प्रेम या वर्तमान मे होने वाले घटनक्रम। मैं इन चीजों के बारे में जो महसूस करती हूँ वहीं लिखती हूँ। मुझे लगता है की हर मनुष्य अपने लिंग, धर्म, आर्थिक परिस्थिति की परवाह किए बिना सम्मान तथा योग्यता का पूरा हकदार है। इसलिए मेरी कविताओं का मेरे भावनाओं को व्यक्त करना अती आवश्यक है। कविताएं मेरे लिए व्यक्तिगत भी है और राजनैतिक भी।

सवालः आपको ऐसा क्यों लगता है कि साहित्य और कविताओं को उतना सपोर्ट और क्रेडिबिलिटी नहीं मिलती है जितना उसका हक है?

रम्या: मनुष्यता और कला को हमारे सिस्टम में कोई जगह नहीं है। इन बढ़ते सालों में हमें उन चीजों पर ध्यान देने पर मजबूर किया गया है जो हमें लगते है की "कमाने लायक" है। इसका अर्थ यह हुआ की कला, संस्कृति, भाषा या खेल को जाँचने में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए इस दुनिया में बहुत कम जगह है। लोग वास्तविकता मैं यह मानते चलते हैं की मनोरंजन का एक ही माध्यम है। (मल्टीप्लेक्स लोग सिनेमा हाल में बॉलीवुड फिल्म्स, दारू और जोरदार शोर के साथ पार्टियां)। ज्यादातर लोग जो पढ़ते हैं, वे उन परिवारों में पले-बड़े हुए जो उन्हें साहित्य की सराहना करने के लिए बचपन से सिखाते थे।

जो कोई भी कवि सम्मेलन में आता है वह या तो खुश नसीब होता है की वह संस्कृति की गोद में बड़ा हुआ है या तो उसे अपने सारी योजनाओं को काबू में कर आना पड़ता है। बहुत सारे लोगों ने मुझे बताया है की उन्हें कविता "समझ में नहीं आती" क्योंकि उन्हें लगता है की कविताएं बहुत कठिन शब्दों से बनी होती है जो उनके लिए किसी अर्थ के नहीं होती। मैं अपनी कविताओं/प्रदर्शनों को आसान तथा सरल रखने की कोशिश करती हूँ क्योंकि कुछ ऐसा लिखने का फायदा क्या जब किसी को समझ में ही न आएं? आज की कविताओं को "कूल" माना जाता है इसलिए अधिक लोग कविताओं की तरफ खिंचे जा रहे हैं। मैं उम्मीद करती हूँ यह और ज्यादा लोगों को कविता की तरफ प्रभावित करें।

सवालः स्पोकन वर्ड आर्टिस्ट या कवि जो आपके बिरादरी से हो क्या आप उन्हें सराहते हैं? 

रम्या:
स्पोकन वर्ड अभी भी मुम्बई के लिए बहुत नया है और हम सब उसके प्रारूप को जांच रहे हैं। उसके लिए मैं हर उस व्यक्ति को प्रेरणादायी मानती हूँ जो श्रोतागणों को आकर्षित करता है, जैसे शिक्षक, वक्ता, नेता, अभिनेता और अन्य कलाकार आदि। एक लेखक के रुप में मैंने जिन शब्दों के खिलाड़ियों को सराहा है वह है - मिलन कुंडेरा, रिचर्ड बच, जे.के. रौलिंग, अलेक्ष्संडर मेककालस्मिथ, आर. के नारायण, मारिया पूझो, पी. जी. वोडहाउस और चक पाल्हानिक।

सवालः आखिरकार, ऐसी कुछ पाँच किताबें जिन्हें आप उत्साही पुस्तकप्रेमियों रेकमेन्ड करेंगे? 

रम्या:
यह रही कुछ किताबें जो मुझे सुखद अनुभव देती है -
१ वीनस ट्राईन्स एट मिडनाइट - लिंडा गुदमन की कविता की किताब।
२ ड्रीम एंगस - अलेक्जेंडर मैककॉल-स्मिथ द्वारा लिखी
३ दी सैंडमन - नील गैमन की एक ग्राफिक नोवेल सीरीज।
४ दी लिटल प्रिंस - एंटनी सेंटएक्सुपरी । 
५ दी ग्रीन मईल - स्टीफन किंग।

रम्या को फ्रीवर्स सेशंज मे लाइव परफॉर्म करते देखें - इस शनिवार तोड़ी मील सोशल में। इवेंट से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

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