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पत्नी पत्नी और वो मूवी रिव्यू: यह प्रेम त्रिकोण रास आएगी | नयी बॉलीवुड खबरे & Gossip

पत्नी पत्नी और वो मूवी रिव्यू: यह प्रेम त्रिकोण रास आएगी

By - अनुप्रिया वर्मा

DECEMBER 06,2019

पत्नी पत्नी और वो
मुद्दस्सर अजीज की फिल्म पति पत्नी और वो 2019 के दौर को ध्यान में रख कर गढ़ी गई है। यह मॉडर्न वक्त का सिनेमा है। फिल्म का एक संवाद है कि यह दौर कुंठाओं का है। दरअसल, यही इस फिल्म का सार भी है। फिल्म के निर्देशक ने अपने विजन को खूबसूरती से स्थापित किया है, कि यह वह दौर नहीं, जब पति की बेवफ़ाई पर पत्नी आंसू बहाए, बल्कि यह वह दौर है, जब पति को उसकी बेवफाई पर मजा चखाया जाए।

निर्देशक ने फिल्म में अपनी महिला पात्रों को बहुत मजबूती से दिखाया है। यहीं इस फिल्म की खूबी है। अच्छा हुआ है कि यहां एक पति को लाचार और अपनी पत्नी से प्यार ना मिलने पर दुखी रहने वाला तन्हा नहीं दिखा कर, एक मर्द के उस पहलू को दिखाने की कोशिश की है, जहां उसे हर पुरानी चीज से बोरियत होती है और नई चीज में फ्रेशनेस नजर आती है। इस क्रम में वह किसी भी हद तक गिरने को तैयार रहता है। निर्देशक ने एक अच्छा टेक लिया है। उन्होंने फिल्म को मनोरंजक तरीके से पेश किया है। 

फिल्म में पत्नी यह भी कहती है कि शादीशुदा जिंदगी में विश्वास चिड़िया का नाम होता है। एक बार उड़ जाए तो फिर हाथ नहीं आती। इस दौर में जब एक्स्ट्रा मेरेटियल अफेयर होना सिर्फ शौक और फैशन बन चुका है, उस पर यह फिल्म एक कड़ा कटाक्ष करती है । फिल्म यह भी दावा नहीं करती कि उनकी इस फिल्म से मर्द सुधर गए हैं। वह एक फिल्म से कायाकल्प होते नहीं दिखाते। यह भी इस फिल्म की खूबी है। वह दर्शकों पर जजमेंट करने का विकल्प छोड़ते हैं।

कहानी की बात करें तो, यह 1978 में आयी संजीव कुमार की सुपरहिट फिल्म का रिमेक है।कहानी को आज के परिवेश में कहा गया है । एक दिलचस्प बात निर्देशक ने और दिखाई है कि भले ही मर्दों के पास महिलाओं के हजार विकल्प हों, मगर महिलाओं के पास हमेशा ही एकाध विकल्प अधिक होंगे। बस महिलाएं उसका इस्तेमाल करना नहीं जानती। ठीक वैसे ही जैसे इस फिल्म में वेदिका ने अपना रामबाण चला कर अपनी इज्जत वापस ली। यह फिल्म यह भी संदेश देती है कि अगर आपका दिल मनचला है तो शादी में मत बंधिए और परिवार वाले जिनके प्रेशर में आकर लड़के और लड़कियां शादी कर लेते हैं और फिर रिश्ते को निभा नहीं पाते । ऐसा भी हरगिज़ ना करें। लेकिन यह हकीकत भी है कि भारत में अस्सी से ज्यादा प्रतिशत शादियां पारिवारिक प्रेशर की वजह से ही होती है।

फिल्म की कहानी कानपुर के चिंटू त्यागी उर्फ अभिनव त्यागी (कार्तिक आर्यन) की है। पढ़ाई में फोकस करने वाले चिंटू की इंजीनियरिंग के बाद प वेदिका (भूमि पेंडेकर) से शादी हो जाती है। चिंटू अपनी बोरिंग लाइफ में थोड़ा एंटरटेनमेंट लाने के लिए अपनी पत्नी के साथ साथ किसी अन्य महिला ( अनन्या पांडे) के प्रेम में पड़ जाता है. और यहां से झूठ का पलड़ा भारी होता जाता है। अपने दोस्त का बचाने के लिए उनके दोस्त भी उसका पूरा साथ देते हैं। इस झूठ को छिपाने के लिए किस तरह पूरा माहौल और घटनाएं बनती है। फिल्म उसी में रोचक बनती जाती है। इस कहानी को कॉमेडी के अंदाज़ में कहा गया है, जिसके कारण कहानी में कुछ नयापन ना होने के बावजूद फिल्म रोचक लगी है। फ़िल्म का स्क्रीनप्ले जबर्दस्त है और निर्देशक ने बेहतरीन संवाद लिखे हैं। 

अभिनय की बात करें तो  फिल्म में एक्टिंग सभी कलाकारों ने अच्छी की है। कार्तिक छोटे शहर के किरदार में ढले हैं। उनका ट्रेडमार्क मोनोलॉग दृश्य इस फ़िल्म में भी है ।भूमि पेंडेकर शानदार रही है   लेकिन अनन्या अपनी दूसरी फिल्म भी खूब  चौकाती है। वह पूरे  आत्मविश्वास के साथ  नजर आई हैं।  वह आगे अच्छा ही करेंगी। उन्होंने अपने किरदार को जिया है।उसकी तारीफ होनी चाहिए। अपारशक्ति खुराना भी लगातार अच्छा कर रहे हैं।  फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है।फिल्म फैमिली एंटरटेनिंग है।

फ़िल्म पत्नी पत्नी और वो
निर्माता टी सीरीज एंड बी आर फिल्म्स
निर्देशक मुदस्सर अज़ीज़
कलाकार-कार्तिक आर्यन,भूमि पेंडेकर,अनन्या पांडे और अन्य
रेटिंग :  साढ़े तीन (३.५)

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