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‘छपाक’ मूवी रिव्यूः समाज के नकारेपन पर जोरदार तमाचा | नयी बॉलीवुड खबरे & Gossip

‘छपाक’ मूवी रिव्यूः समाज के नकारेपन पर जोरदार तमाचा

By - अनुप्रिया वर्मा

JANUARY 10,2020

छपाक, दीपिका पादुकोण, विक्रांत मेसी, मधुरजीत, मेघना गुलजार, छपाक मूवी रिव्यू
अगर मानवता जिन्दा है और अगर आपको आज भी किसी के दुःख से दिल में दर्द होता है तो छपाक आपके लिए एक आवश्यक फिल्म है। छपाक जैसी फिल्मों का बनना इसलिए भी जरूरी है कि उन लड़कियों को हौंसला मिल पाएं और उन्हें भी अहसास हो कि  उन्हें कोई सुन रहा है, कोई उनकी भी बात कर रहा है। ऐसे में जब दुनिया उनसे मुंह फेर चुकी है, ऐसे में जब एसिड सर्वाइवर लड़कियां घोस्ट स्टोरीज से जूझ रही हैं, जब उन्हें अपनी शक्ल के कारण  कभी भूत तो कभी चुड़ैल जैसे नामों से सम्बोधित किया जा रहा होता है। खुद अलोक दीक्षित ने अपने फेसबुक वॉल पर इस बात का जिक्र किया है कि मेघना और दीपिका के इस प्रयास से, इस फिल्म बनने के कारण एसिड अटैक सर्वाइवर लड़कियों के मन में उम्मीद बंधी हैं कि शायद सोआइटी का रवैया उनके प्रति बदलेगा। इस लिहाज से दीपिका और मेघना की तारीफ़ होनी ही चाहिए।  हालांकि  दक्षिण भारत में अब तक इस मुद्दे पर कई फिल्म बनी है, विशाल चतुर्वेदी नामक डायरेक्टर ने भी कुछ साल पहले लक्ष्मी अग्रवाल को लेकर ही लक्ष्मी की कहानी कहने के लिए शार्ट फिल्म बनाई थी। लेकिन बड़े स्तर पर हिंदी सिनेमा में बनी यह पहली फिल्म है इस अहम मुद्दे पर। 

मेघना की यह फिल्म लक्ष्मी अग्रवाल को केंद्र में रखते हुए उन तमाम एसिड सर्वाइवर की कहानी बयान करती है, जिनकी जिंदगी छपाक से एक दरिंदे ने बदल दी है। फिल्म की खासियत मगर यह है कि फिल्म में मेघना ने लक्ष्मी का किरदार निभा रही मालती (दीपिका पादुकोण) को कहीं भी बेचारी बनाने का प्रयास नहीं किया है, बल्कि उसके हौसले को बुलंदी से दिखाया है। लक्ष्मी के रूप में मालती के किरदार में दीपिका ने बेखौफ होकर अपना किरदार निभाया है। मेघना की यह खासियत रही है कि वह अपनी महिला पात्रों को हमेशा मजबूती से दर्शाती हैं, उन्हें वह लाचार दिखाने में यकीन नहीं रखती हैं। मालती में भी वह हौसला नजर आता है। मेघना समाज की उस सोच पर भी प्रहार करती है, जहां एसिड अटैक होने के बावजूद मालती के मोबाइल के नंबर होने से उसके चरित्र का चित्रण किया जाता है, बजाय इसके कि दोषी को पकड़ा जाये। मेघना समाज का वह असली चेहरा दिखाने से गुरेज नहीं करती। इस फिल्म की खूबी है कि फिल्म आपको अंदर से झकझोर देती है, कई सवाल पूछने पर मजबूर करती हैं। वहीं साथ ही साथ अमोल (विक्रांत मेसी) और मालती के खूबसूरत प्रेम कहानी भी साथ लिए चलता है।   

कहानी दिल्ली की रहने वाली मध्यमवर्गीय मालती की जिंदगी से शुरू होती है, जिसे पढ़ने में अधिक दिलचस्पी नहीं है। उसे तो इंडियन आयडल बनना है। लेकिन उसकी जिंदगी में ग्रहण उसदिन लग जाता है, जब उसके ही परिवार को जानने वाला एक शक्श बसीर खान अपनी बहन के साथ इस घटिया घटना को अंजाम देता है, मालती की पूरी जिंदगी तबाह हो जाती है। लेकिन अपनी लैंडलॉर्ड और वकील( मधुरजीत ) की मदद से मालती हिम्मत नहीं हारती है और वह एसिड की बिक्री पर रोक लगाने को लेकर मुहीम चलाती है, आरोपी के खिलाफ कई सालों तक कानूनी जंग  लड़ती है। इस बीच उसे अमोल का साथ मिलता है, जो कि  ऐसिड सर्वाइवर महिलाओं के लिए काम कर रहा है। दोनों के बीच प्रेम पनपता है। यह फिल्म यह भी दर्शाती है कि  इसी समाज में जहाँ बसीर जैसा दरिंदा हैवान मर्द भी है, जो औरत को खिलौना समझता है, उसी समाज में अमोल जैसे मर्द भी हैं, जिनके लिए जिस्म की खूबसूरती से अधिक मन की खूबसूरती भी है। वास्तविक जिंदगी में भी आलोक और लक्ष्मी की प्रेम कहानी एक मिसाल तो है ही। 

दीपिका ने नि:संदेह अपने करियर के बेस्ट परफॉर्मेंस में से उत्कृष्ट अभिनय इस फिल्म में किया है, विक्रांत ने भी कम दृश्यों में प्रभावशाली अभिनय किया है। लेकिन चूक रही है तो मेघना की कहानी कहने की शैली में, जिसमें वह माहिर रही हैं। तलवार और राजी जैसी फिल्मों की मेकर कहानी के लिहाज से इस कदर चुकेंगी, यह उम्मीद नहीं थीं।  फिल्म में चूंकि सब्जेट ही काफी संवेदनशील है तो जाहिर है कि आप फिल्म देखते वक़्त उन महिलाओं को दर्द को महसूस करते हैं, लेकिन जितनी उम्मीद थी, उस हद तक फिल्म गहराई तक नहीं जाती है, कहानी में कई आयाम नहीं दिखते हैं। शायद वे वेरिएशन होते तो फिल्म एक यादगार और महान फिल्म बन जाती। फिल्म की पटकथा बेहद कमजोर लगी। जहाँ फिल्म ने अंतराल के पहले रोंगटे खड़े किये, सेकेण्ड हाफ में फिल्म धप्प से गिर जाती है। बहरहाल, ऐसी फिल्में और बनें, इसलिए ऐसी फिल्मों का सफल होना आवश्यक है।

फिल्म : छपाक 
कलाकार : दीपिका पादुकोण, विक्रांत मेसी, मधुरजीत 
निर्देशक : मेघना गुलजार 

यहां देखें फिल्म का ट्रेलर -

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