Now Playing :

उजड़ा चमन मूवी रिव्यू: सिर दर्द करवाना चाहते हैं तो इस उजड़े चमन में स्वागत है | नयी बॉलीवुड खबरे & Gossip

उजड़ा चमन मूवी रिव्यू: सिर दर्द करवाना चाहते हैं तो इस उजड़े चमन में स्वागत है

By - अनुप्रिया वर्मा

NOVEMBER 01,2019

उजड़ा चमन, मूवी रिव्यू, सनी सिंह, मानवी गागरू, सौरभ शुक्ला
क्या आप सिर दर्द से परेशान नहीं हैं। क्या आप चाहते हैं कि किसी फिल्म को देखने के बाद आप स्ट्रेस के शिकार हो जाएं और आपके बाल झड़ने लगे और फिर आप गंजेपन का शिकार हो जाएं। क्या आप बेवजह सिर दर्द की दवाईयां खाने की लत शुरू करना चाहते हैं। अगर आप वाकई यह सबकुछ करना चाहते हैं तो उजड़े चमन में आपका स्वागत है। अब आपके जेहन में बार बार यह बातें आ रही होंगी कि हम क्यों यह सब कह रहे तो आपको बता दें कि उजड़ा चमन चीज ही ऐसी बनी है, जो अच्छे विषय के नाम पर आपको ऐसा तेल लगाने वाली है, जिसमें फिसल कर आप चोट ही खाएंगे और आपका सिर ही चकराने वाला है। और कहानी के उलझन से आपके सिर में खुजली ही होने वाली है। 

उजड़ा चमन ठीक वैसे ही विज्ञापनों जैसा है, जो बड़े वादे कर आपको घटिया प्रोडक्ट थमा देता है और जो आपके बालों के लिए हानिकारक साबित होता है। इस फिल्म के मेकर्स ने फिल्म की मार्केटिंग और प्रोमो में जितने जतन किए हैं, फिल्म उतनी ही खोखली और कमजोर है। केवल विषय मात्र चुन लेने भर से काम पूरा हो जाता तो हिंदी सिनेमा में ऐसी कई फिल्में बन गई रहतीं। फिल्म के मेकर्स ने रिलीज के वक़्त बाला जो कि इसी विषय पर बनी फिल्म है, उससे पंगा लेकर दर्शकों का ध्यान महज आकर्षित करने के लिए किया है। चूंकि कहानी बेहद कमजोर है। 

यह फिल्म किसी संदेश तक नहीं पहुंचती बल्कि उलझनों के बीच सिमट कर रह जाती है। कहानी शादी का ऐसा हौआ बना देती है, जैसे जिंदगी में उसके सिवा और कोई अहम काम है ही नहीं। निर्देशक ने खुद ही अपने किरदार का मजाक बनाया है और मुख्य किरदार ने भी ऐसा अभिनय किया है कि किसी ऐंगल से उनसे जुड़ाव महसूस नहीं होता। उनका दुख दुख नहीं लगता। निर्देशक चाहते तो इसमें और भी आयाम जोड़ सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने मुख्य किरदार को ऐसा ड्सेप्रेट दिखाया है कि वह बोर करता है और किरदार पर गुस्सा आता है। वह खुद तो गंजा है, लेकिन दुल्हन उसे अप्सरा चाहिए। वह लड़कियों के पीछे लट्टू रहता है। 

निर्देशक ने डबल। मीनिंग संवाद इस्तेमाल करने में भी बेवजह का उतावलापन दिखाया है तो दूसरी तरफ मॉडर्न और आदर्श बनने के लिए फिल्म में संदेश और बेवजह का ड्रामा क्रियेट करने की भी कोशिश की है। फिल्म में सबकुछ बिना लौजिक के होता जाता है। अचानक कल तक उसे भाव नहीं देने वाली टीचर उससे प्यार करने लगती है। अभिनेत्री को अचानक ही चमन से प्यार हो जाता है। जबकि वह उसके मोटापे का मजाक उड़ा चुका होता है। फिर कमजोर क्लाइमेक्स भी फिल्म की सबसे बड़ी खामी है। फिल्म में सबकुछ दिखाने के चक्कर में निर्देशक पूरी तरह भटक गए हैं। और यह तय है कि फिल्म को लेकर किए गए विवाद उन्हें कामयाबी नहीं दिला पाएंगे।

फिल्म कन्नड़ फिल्म ओंदू मोटया कोंदू का हिंदी रिमेक है। फिल्म दिल्ली के बैकड्रॉप पर है। चमन( सन्नी सिंह) फिल्म का मुख्य किरदार है, जो गंजा है। वह इस दुख में है। लेकिन पांच सालों से अपनी शादी ना हो पाने की वज़ह से भी दुखी है। वह तीस साल का हो चुका है। उसके माता पिता भी लड़की ढूंढ ढूंढ के परेशान है। उसकी शादी नहीं हो रही। सरकारी नौकरी होने के बावजूद और घर के पुरोहित ने भी बता दिया है कि 31का होने से पहले चमन की शादी नहीं हुई तो वह कुंवारा रह जाएगा आजीवन। चमन शादी के चक्कर में अपने कॉलेज की एक स्टूडेंट से उल्लू बनता है। लेकिन इसी बीच डेटिंग एप पर एक लड़की मिलती है अप्सरा, जो काफी मोटी है। दोनों शुरुआत में एक दूसरे का मजाक बनाते हैं। यह सच है कि हमारे समाज में आज भी शादी के लिए लड़की का गोरा और खूबसूरत और स्लिम होना मापदंड होता है। इनर ब्यूटी कोई नहीं देखता। फिल्म में इस पहलू को बहुत खूबसूरती से दर्शाया जा सकता था। लेकिन निर्देशक ने इसी अहम पहलू पर अपनी बहुत ही सतही विजन दी है। यहीं बात फिल्म को कमजोर बनाती है। 

गंजे की शादी नहीं हो रही है, इस बात को फिर मैं इतनी बार दो रहा है कि ऐसा  लगता है कि निर्देशक खुद ही अपने विषय का मजाक बना रहा है। इन सब के बाद हैप्पी एंडिंग हो जाती है और फिल्म किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती है। तमाम उल जलूल दृश्यों के बाद फिल्म का मुख्य किरदार उबाऊ सा मोनोलोग देता है जो काफी बकवास है। फिल्म बेवजह की लंबी है।

अभनिय की बात करें तो मानवी और फिल्म के सह कलाकार खासतौर से गृ षा कपूर ने बहुत अच्छा काम किया है। सन्नी निराश करते हैं। पूरी फिल्म में उनका एक ही भाव था। शारिब छोटे मगर दमदार किरदार में हैं। ऐश्वर्य सकूजा ने ठीक काम किया है।
फिल्म देख कर ऐसा लग रहा है कि निर्देशक ने सिर्फ ह ठ में फिल्म बनाने में जल्दबाजी दिखाई है कि वह बाला से पहले रिलीज कर खुद को फर्स्ट साबित कर दें। लेकिन हो सकता है कि रिलीज तारीख की रेस में बाला हारी हो, मगर फिल्म कामयाब हो। तो हारकर जीतने वाले को बाजीगर कहना ही पड़ेगा।

फिल्म : उजड़ा चमन
कलाकार: सनी सिंह, मानवी गागरू, सौरभ शुक्ला, शारिब हाशमी, ऐश्वर्या शकुजा, गृषा कपूर
निर्देशक : अभिषेक पाठक
समीक्षक : अनुप्रिया वर्मा

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.OK