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जानिये आनंद क्यों लेते हैं सोनम कपूर से पैसे, जब भी करते हैं वह उन्हें जूते गिफ्ट | बॉलीवुड सेलिब्रिटी इंटरव्यूज

जानिये आनंद क्यों लेते हैं सोनम कपूर से पैसे, जब भी करते हैं वह उन्हें जूते गिफ्ट

By - टीम रेडियो सिटी - अनुप्रिया वर्मा

SEPTEMBER 12,2019

सोनम कपूर, द जोया फैक्टर, आनंद आहूजा
सोनम कपूर की आने वाली फिल्म द जोया फैक्टर है। इन दिनों वह फिल्म के प्रोमोशन में जम कर लगी हैं। फिल्म के प्रोमोशन के दौरान उन्होंने काफी सारी  बातें हमसे शेयर की। पेश है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश। फिल्म की कहानी लक और मेहनत के फर्क को दिखाती हैं। ऐसे में सोनम इस बारे में क्या सोच रखती हैं, आइये उनसे ही जान लेते हैं। 

किस्मत और मेहनत दोनों जरूरी है 
सोनम का मानना है कि किस्मत और मेहनत दोsonamनों का सही समावेश हो तभी आपको सफलता मिल सकती है। वह कहती हैं कि मैं मानती हूं कि मौके किस्मत से ही मिलते हैं लेकिन उसके बाद आपकी मेहनत ही होगी, तभी आप मुकाम हासिल कर पाएंगे।  

पापा के लिए लकी रही हूँ
सोनम कहती हैं कि फिल्म के ट्रेलर लांच के दौरान भी उन्होंने यह बात स्वीकारी थी और अब भी वह यह बात दोहराना चाहेंगी कि यह सच है कि उनके पापा मानते हैं कि वह अपने पापा के लिए लकी रही हैं। वह लेकिन इस बारे में कहती हैं कि मैं अनिल कपूर के घर में पैदा हुई तो ये मेरी किस्मत है। मैं फिल्मों में आना चाहती थी जबकि मेरे पिता चाहते थे कि मैं विदेश पढ़ाई के लिए जाऊं। मैं अपनी पहचान छिपा कर भंसाली सर से मिलने गयी थी कि मैं अनिल कपूर की बेटी हूं। रणबीर कपूर मेरे दोस्त थे और वह वहां असस्टेंट का काम कर रहे थे। मैं उसी काम को पाने के लिए गयी थी क्योंकि मैं  डायरेक्टर बनना चाहती थी। फिर सोनम आगे बताती हैं कि किस तरह संजय भंसाली ने उन्हें देखा और कहा कि मैं तुम्हें एक्टिंग करते हुए देखना चाहता हूं। लेकिन उसके बाद सांवरिया का हिस्सा बनने के लिए मुझे बहुत बार ऑडिशन प्रोसेस से गुजरना पड़ा। दिल्ली 6 भी मैंने ऑडिशन के ज़रिए ही पाया था मतलब कड़ी मेहनत वहाँ भी थी।

पिता अनिल कपूर के वर्कआउट्स वीडियो पर -
इनदिनों अनिल कपूर अपने वर्कआउट्स के वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट करते नज़र आ रहे हैं। जब सोनम से पिता अनिल कपूर के वर्कआउट के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा - हां, मैं भी पापा को कहती रहती हूं कि डैड आप क्या कर रहे हैं। वाकई 62 साल की उम्र ऐसा वर्कआउट। कमाल का है। डैड कहते भी हैं कि देखो मैं भी युवा हूं और सोशल मीडिया के इस दौर में समायिक भी हूं।

शादी के बाद कितनी बदली है जिंदगी -
सोनम कहती हैं कि उनके पति आनंद आहूजा उन्हें हर काम में सपोर्ट करते हैं और वह बिल्कुल नहीं चाहते कि वह सिर्फ और सिर्फ इसी तरह रहें, वह चाहते हैं कि सोनम अपने करियर पर फोकस करें। वह कहती हैं कि उन्हें अपने काम से प्यार है और वह शादी के बाद भी इसलिए अपने काम पर जल्द ही लौट आई थीं।  

वह आगे कहती हैं कि हाँ वह अपने परिवार को बहुत मिस करती हैं। वह कहती हैं कि जब मैं लंदन में होती हूं। यहां आती भी हूं तो काम के सिलसिले में तो ज़्यादा समय नहीं बिता पाती हूं। जितना बिताना चाहती हूं तो उनकी चिंता रहती है। फ़ोन,वीडियो के ज़रिए टच में रहती हूं।

आनंद से रहती हूँ टच में -
सोनम का कहना है कि वह आनंद से दो हफ़्तों से ज्यादा दूर नहीं रह सकती हैं। वह हमेशा उनसे मिलने चली जाती हैं और मिल कर चली आती हैं। वह आगे कहती हैं कि  अगर आपके लाइफ पार्टनर दूर रहते हैं तो फेस टाइम, स्काइप के ज़रिए एक दूसरे से जुड़े रहिये। दिन में एक खाना साथ में खाइए भले ही स्काइप के ज़रिए से ही। उसमें बस आप दोनों ही हो और दो हफ्ते से ज़्यादा दूर मत रहिए। आजकल ट्रेवलिंग आसान हो गयी है। पहले तो दो दो महीने हो जाते थे लेकिन अब मैं टाइम को किसी तरह मैनेज करके दो हफ्तों में आनंद से मिलने लंदन पहुँच ही जाती हूं। द जोया फैक्टर के प्रमोशन की वजह से दस दिन तो नहीं जा पाऊंगी।

मिस्टर इंडिया के रीमेक में काम -
सोनम कहती हैं कि वह चाहती हैं कि वह मिस्टर इंडिया के रीमेक में काम करें। वह कहती हैं कि मैं मिस्टर इंडिया का रीमेक करना चाहूंगी। वो भी टाइटल रोल। लड़का ही करें क्यों जरूरी है वो। डैड और बोनी कपूर अंकल के पास राइट्स हैं वो दे देंगे तो ज़रूर करूँगी। 33 साल हो गए उस फिल्म को रीमेक बनना चाहिए। फ़िल्म में सभी ने बहुत अच्छा काम किया था। एक मासूमियत थी मिस्टर इंडिया के किरदार में जो खास था।

लंदन और भारत में है ये फर्क -
आपको जान कर हैरानी होगी लेकिन सोनम लंदन में अपने सारे काम खुद ही करती हैं।  वह कहती हैं कि वहां सारा काम खुद करना पड़ता है। सोनम को कुकिंग पसंद हैं, लेकिन वॉशिंग नहीं पसंद है। डिश वॉशर है तो बच जाती हूं। साथ ही उन्हें अच्छा लगता है कि  वहां आप बाहर टहल सकते हैं। मुम्बई में तो जगह ही नहीं है। इतने लोग हैं। इतना कंस्ट्रक्शन चल रहा है। सब जगह धूल मिट्टी है लेकिन हां घर मुम्बई में है परिवार भी तो आना ही पड़ता है। दिल्ली उस लिहाज से ज़्यादा सही है। वहां गार्डेन्स बहुत है।

आनंद को देती हूँ जूतों के पैसे -
सोनम कहती हैं कि आनंद को वह जूतों के पैसे देती हैं, क्योंकि किसी अपने को जूते तोहफे नहीं दिए जाते हैं। अपने में मानते हैं ना कि अपने किसी को शूज गिफ्ट्स नहीं करते हैं। मैंने आनंद को ये भी बोला लेकिन उसने उसका भी हल ढूंढ लिया है अब वो कोई भी शूज या स्नीकर्स मेरे लिए लेता है तो मेरे बैग से पांच रुपये ले लेता है।

अंधविश्वास पर विश्वास -
सोनम कहती हैं कि हां, हम भारतीय है ये हमारे अंदर सिस्टम में होता है। कहीं यात्रा करने जाते हैं तो भगवान का नाम लेते हैं। गायत्री मंत्र से भी बहुत अच्छे वाइब्स भी आते हैं। मां बोलती है ज़्यादा नहीं बोलने का ये अच्छा वो अच्छा है। वरना नज़र लग जाती है

दुलकर सलमान के साथ अनुभव -
सोनम का मानना है कि दुलकर बहुत ही क्लासी इंसान हैं। वह शांत हैं, तमीज़वाला भी हैं। बहुत ही अच्छा व्यवहार उसका है। मैं बहुत ही मुंह फट हूं वो नहीं। आनंद की तरह दुलकर भी है। दोनों की राशि सिंह है। मैं आनंद को गौतम बुद्ध बुलाती हूं। वो बहुत शांत है। मैं उसके अपोजिट हूं। मेरी बहन कहती हैं कि मुझे सिर्फ आनंद ही हैंडल कर सकता है।

वर्ल्ड कप के वक़्त फिल्म -
यह पूछे जाने पर कि क्या यह फिल्म वर्ल्ड कप के वक़्त आती तो अच्छा नहीं होता ? वह कहती हैं कि फिल्म के सीजी में वक़्त चला गया। क्रिकेट स्टेडियम वो सब दिखाना आसान नहीं था। उस वक़्त बहुत सारी बड़ी फिल्में भी रिलीज हो रही थी। हमारी फ़िल्म छोटी है तो थोड़ा उसको वक़्त चाहिए।सांस लेने के लिए।

निर्देशन की तैयारी में सोनम -
सोनम तीन चार सालों के बाद निर्देशन की तैयारी में हैं। वह कहती हैं कि हाँ यह सच है कि वह निर्देशन करना चाहती हैं। लेकिन अभी वह कहानी पर काम कर रही हैं। अभी उसमें वक़्त है। तीन-चार साल जाएंगे।

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