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जब एक एस्ट्रॉलजर ने कह दिया था विद्या को, तू कभी फिल्मों में नहीं जायेगी, फिर विद्या ने जो किया... | बॉलीवुड सेलिब्रिटी इंटरव्यूज

जब एक एस्ट्रॉलजर ने कह दिया था विद्या को, तू कभी फिल्मों में नहीं जायेगी, फिर विद्या ने जो किया...

By - टीम रेडियो सिटी - अनुप्रिया वर्मा

AUGUST 12,2019

विद्या बालन, मिशन मंगल
विद्या बालन की सबसे खास बात यह है कि वह हमेशा आत्मविश्वास के साथ बात करती हैं और इस मुकाम पर पहुंचने के बावजूद आज भी वह बेहद विनम्र हैं। यही उनकी सबसे बड़ी खासियत है,जो बॉलीवुड इंडस्ट्री में उन्हें औरों से अलहदा बनाता है। इन दिनों वह मिशन मंगल के प्रोमोशन में व्यस्त हैं। इस दौरान उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश -

अक्षय के घर से आता था खाना
विद्या बताती हैं कि इस फिल्म में उन्हें बहुत ही अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। इस बात से वह बेहद खुश होती हैं। साथ ही वह यह भी कहती हैं कि सोनाक्षी, तापसी, नित्या, र्कीति सारी ही अभिनेत्री अपने आप में इस कदर सेक्योर हैं कि किसी को भी किसी से किसी भी तरह की शिकायत नहीं हुई। सभी ने न सिर्फ मिल कर सेट पर खूब एंजॉय किया, बल्कि सबसे ज्यादा टांग खिंचाई तो अक्षय की विद्या ने की है। लेकिन विद्या यह भी बताती है कि अक्षय ने पूरी टीम के लिए 22 दिनों तक जब तक फिल्म की शूटिंग चली है, लगातार घर का खाना लेकर आते थे और सभी टीम की तरह एक साथ मिल कर खाते थे।

एस्ट्रोलॉजी पर विश्वास नहीं
विद्या कहती हैं कि वह मानती हैं कि अब एस्ट्रोलॉजी को भी साइंस माना जाने लगा है। लेकिन वह अपने आत्मविश्वास के अलावा किसी भी इस तरह की चीजों पर विश्वास नहीं करती हैं। 

वह अपने पुराने दौर का किस्सा सुनाते हुए कहती हैं कि पहले मेरी मम्मी मुझे एक एस्ट्रोलॉजर के पास ले गयी थी, उन्होंने कहा था कि सबकुछ अच्छा होगा। उस वक्त जब मुझे फिल्मों से लगातार निकाला जा रहा था। उस फिल्म से भी मैं निकल गयी थी। तमिल फिल्म थी मेरी। तब भी मैंने कहा कि देखो मां ये सब कुछ नहीं होता था। 

फिर एक बार एक पामिस्ट ने कहा था कि तुम सिर्फ टेलीविजन करोगी, लेकिन पिक्चर में कभी नहीं आओगी। वह भी बात गलत साबित हुई। उनसे मिल कर तो मैं बाहर निकली और मैंने मां को कह दिया था कि इसको तो मैं फिल्मों में आकर दिखा दूंगी। मैंने शुरुआती दौर में बहुत सारे रिजेक् शन झेले हैं। कितने रात मैंने रोते-रोते सोकर गुजारे हैं। लेकिन मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी और फिर डटी रही तो यहां तक पहुंची हूं।

अक्षय मुझे गुंडी कहते हैं
विद्या कहती हैं कि मुझे तो लगा ही नहीं कि मैं उनसे 12 साल के बाद मिल रही हूं। वह मुझे कहते हैं कि मैं लड़का हूं। चूंकि मैं हद से ज्यादा बदमाशी करती हूं तो मैं उनको कहती हूं कि शुरुआती दौर में आपके साथ फिल्मों में काम करके, आपसे ही यह सब सीखा है। लेकिन सच मुच इस फिल्म के कारण हमने एक दूसरे की कंपनी खूब एंजॉय की।

40 के बाद नहीं है जिंदगी, झूठ है
विद्या कहती हैं कि यह बकवास बात है कि 40 के बाद कोई जिंदगी नहीं है। विद्या कहती हैं कि वह तो अब ज्यादा एंजॉय करने लगी हैं। बकौल विद्या  मुझे लगता है  कि आप उम्र के साथ अधिक मैच्योर होते हैं। मुझे खुशी है कि इस लेवल पर आप अपने आप को स्वीकारने लगते हैं कि आप जैसे हो. वैसे हो. जिंदगी फिर आसान लगने लगती है। आप छोटी चीजों में खुशी ढूंढ़ने लगते हैं। मैं तो इस उम्र में आकर अधिक बदमाशी करने लगी हूं।

बदला है हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का रवैया
विद्या कहती हैं कि  हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों को लेकर बदलाव हुए हैं।  वह कहती हैं कि  बदलाव हुए हैं। नहीं हैं तो बदलाव ला दूंगी।  मैं दस साल से फीमेल सेंट्रिक फिल्में करती आ रही हूं. पहले लगता था कि ये फिल्में नहीं चलेंगी, कुछ फिल्में खूब चलीं, कुछ नहीं चलीं। विद्या आगे कहती हैं कि  मैंने तो खुद 26 साल की उम्र से शुरुआत की है। और मैं तो मरते दम तक एक्टिंग करूंगी।  किसी की भी जिंदगी बच्चे और शादी के बाद रुक नहीं रही है।

प्रेगनेंसी की खबर 
विद्या कहती हैं कि जो भी कहते हैं कि मैं प्रेगनेंट हूं। वह उल्लू के पट्ठे हैं। 
वह कहती हैं कि मुझे समझ नहीं आता कि ऐसी खबरें क्यों बनती हैं, क्योंकि मैं कभी पतली नहीं रही हूं। यही मेरी बॉडी है. हर बार आपको मेरा थोड़ा पेट दिखता है और आप ऐसी खबरें बनाते हैं तो आप मान लीजिए कि मैं जिंदगी भर के लिऐ प्रेगनेंट हूं।

महिलाओं की खूबसूरती की परिभाषा
विद्या कहती हैं कि  पहले यह सोच थी कि अभिनेत्री है तो पतली दिखे, सुंदर और आकर्षक दिखे। उनके लिए आकर्षक होने की यही परिभाषा है।  यह सोच रही है कि आप जवां तभी हैं, जब आप दुबली-पतली हैं और तभी आप मर्दों की चाहत को पूरा कर सकती हैं। यही पर्सेप् शन रहा है। उसकी वजह से मर्द तब महिलाओं में इंटरेस्ट खोने लगते हैं, जब वह जवां नहीं रहती हैं. यह राजा-महाराजाओं के दौर से होता आ रहा है. वह हमेशा जवां लड़कियों से शादी करते रहते थे। लेकिन अब दौर बदल रहा है। अब लोग सोच-समझ कर बड़ी उम्र में भी शादी कर रहे हैं।  खुद अपनी बात करूं तो कई सालों पहले मैंने अपनी बॉडी पर होने वाले कमेंट के बारे में सोचना बदल दिया है।
 
परिवार वालों ने कभी बदसूरत कहा ही नहीं
विद्या कहती हैं कि  मैंने एक फिल्म देखी थी, बहुत पहले। अमेरिकन ब्यूटी। उसमें एक लाइन थी, जो मेरे जेहन में रह गयी कि खूबसूरती वहीं हैं जो खूबसूरती समझी जाये।  मेरे घर पर मुझे  हमेशा ब्यूटीफूल महसूस कराया जाता रहा है। तो, मैंने कभी महसूस ही नहीं किया कि मैं सुंदर नहीं हूं। फिर स्कूल जाते हैं और लोग चिढ़ाने लगते हैं, तब आपको लगने  लगता है कि अच्छा, ये सब बातें भी मायने रखती हैं। लेकिन मेरी जिंदगी में जो भी लोग आये, सभी ने मुझे इस तरह से जिंदगी देखना नहीं सिखाया। तो मेरे लिए कभी परेशानी हुई ही नहीं।
 
जयललिता की बायोपिक 
मैं जयललिता की बायोपिक नहीं कर रही हूं और खुश हूं कि कंगना कर रही हैं। इससे ज्यादा इस पर मुझे कुछ नहीं बोलना है।


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